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TaxCare

छोटे कारोबारी के रूप में ITR फ़ाइल करें

धारा 44AD में आप टर्नओवर का तय हिस्सा लाभ के रूप में घोषित करते हैं और विस्तृत खाता-बही नहीं रखते। TaxCare आपके AIS से जानकारी लाता है, लाभ निकालता है और आपका रिटर्न तैयार करता है।

संक्षेप में

दुकानें, व्यापारी और छोटे कारोबार — धारा 44AD में अनुमानित आय।

कारोबार या पेशे की आय, बिना ऑडिट — नियत तारीख़
31-Aug-2026
धारा 44AD की टर्नओवर सीमा
₹2,00,00,000

क्या यह आप हैं?

  • आप खुद दुकान, व्यापार या छोटा कारोबार चलाते हैं
  • आपका टर्नओवर ₹2,00,00,000 के अंदर है (ज़्यादातर डिजिटल हो तो ₹3,00,00,000)
  • आप विस्तृत खाता-बही की जगह तय लाभ घोषित करना चाहते हैं
  • आप GST में पंजीकृत नहीं हैं — या टैक्स एक्सपर्ट से फ़ाइल कराने को तैयार हैं

कर वर्ष 2025-26 के मुख्य आँकड़े

उन्हीं नियम-तालिकाओं से, जिनसे TaxCare ऐप रिटर्न फ़ाइल करता है।

कारोबार या पेशे की आय, बिना ऑडिट — नियत तारीख़
31-Aug-2026
धारा 44AD की टर्नओवर सीमा
₹2,00,00,000
नकद प्राप्ति 5% तक हो तो 44AD की सीमा
₹3,00,00,000
डिजिटल प्राप्ति पर घोषित लाभ (नकद पर 8%)
6%

TaxCare यह कैसे करता है

सिर्फ़ वही जो ऐप आज करता है — आगे के कोई वादे नहीं।

  1. आपके रिकॉर्ड, अपने-आपPAN जुड़ते ही TaxCare आपका AIS, TIS और फ़ॉर्म 26AS या फ़ॉर्म 168 सीधे इनकम टैक्स पोर्टल से ले आता है।
  2. वह प्राप्ति जो विभाग पहले से देखता हैआपके PAN पर रिपोर्ट हुई कारोबारी और पेशेवर प्राप्ति, उस पर कटे TDS के साथ, आपके AIS से आती है — ताकि आपकी घोषणा विभाग के रिकॉर्ड से मेल खाए।
  3. 44AD में अनुमानित आयबैंक या डिजिटल तरीक़े से मिले टर्नओवर का 6% और नकद टर्नओवर का 8% लाभ घोषित करें, जब तक टर्नओवर ₹2,00,00,000 के अंदर है — या नकद प्राप्ति 5% तक हो तो ₹3,00,00,000।
  4. GST में पंजीकृत? टैक्स एक्सपर्ट फ़ाइल करेंगेअगर आपके AIS में GST टर्नओवर दिखता है, तो आपका रिटर्न TaxCare के टैक्स एक्सपर्ट के पास जाता है, जो उसे आपके GST रिटर्न से मिलाते हैं।
  5. सही फ़ॉर्म, आपके डेटा सेTaxCare आपके रिकॉर्ड से तय करता है कि आप ITR-1, 2, 3 या 4 भरेंगे — और फ़ॉर्म बदलने पर कारण भी बताता है।
  6. ज़रूरत हो तो टैक्स एक्सपर्टअगर आपके रिटर्न में कुछ ऐसा है जो सेल्फ़-फ़ाइलिंग में नहीं आता, तो ऐप से ही उसे TaxCare के सत्यापित टैक्स एक्सपर्ट को सौंपें। बुकिंग से पहले कीमत दिखती है।

आपको क्या चाहिए

ज़्यादातर आँकड़े आपके लिए अपने-आप आ जाते हैं। ये चीज़ें तैयार रखें।

  • आपका PAN, आधार से जुड़ा हुआ

  • OTP के लिए आधार से जुड़ा या पोर्टल पर पंजीकृत मोबाइल

  • साल का टर्नओवर, नकद और बैंक या डिजिटल प्राप्ति में बँटा हुआ

  • साल के अंत के आँकड़े: हाथ में नकद, आपको मिलने वाली और आपकी देनदारी, और स्टॉक

  • चुकाए गए एडवांस टैक्स या सेल्फ़-असेसमेंट टैक्स के चालान

  • रिफ़ंड के लिए आपके नाम का बैंक खाता, इनकम टैक्स पोर्टल पर सत्यापित

  • YouTuber और क्रिएटर ITR कैसे भरें

    YouTube, ब्रांड डील और स्पॉन्सरशिप से होने वाली क्रिएटर की कमाई बिज़नेस या पेशेवर आय की तरह टैक्स होती है। जानें प्रिज़म्प्टिव टैक्सेशन (44ADA के तहत 50%), ITR-3 और ITR-4, ब्रांड से TDS और तारीख़ें।

    5 मिनट में पढ़ें26-Oct-2026 को अपडेट की गई

  • फ़्रीलांसर ITR कैसे भरें

    फ़्रीलांसर की कमाई पेशेवर आय मानी जाती है। ज़्यादातर लोग प्रिज़म्प्टिव योजना चुन सकते हैं, जिसमें प्राप्तियों का आधा हिस्सा मुनाफ़ा माना जाता है और ITR-4 भरा जाता है, या खाते रखकर ITR-3 भर सकते हैं। सीमाएँ, TDS क्रेडिट, एडवांस टैक्स, अंतिम तारीख़ें और रिकॉर्ड जानें।

    4 मिनट में पढ़ें26-Oct-2026 को अपडेट की गई

इस विषय की सभी गाइड देखें

सवाल और जवाब

धारा 44AD क्या है?

छोटे कारोबारों की आसान योजना: बैंक या डिजिटल तरीक़े से मिले टर्नओवर का 6% और नकद टर्नओवर का 8% लाभ माना जाता है, ₹2,00,00,000 तक के टर्नओवर पर — या नकद प्राप्ति 5% तक हो तो ₹3,00,00,000।

डिजिटल टर्नओवर क्यों मायने रखता है?

बैंक या डिजिटल तरीक़े से मिले टर्नओवर पर कम लाभ माना जाता है (8% की जगह 6%), और ज़्यादातर डिजिटल कारोबार को ऊँची टर्नओवर सीमा मिलती है।

मैं GST में पंजीकृत हूँ। क्या खुद फ़ाइल कर सकता हूँ?

अगर आपके AIS में GST टर्नओवर दिखता है, तो TaxCare के टैक्स एक्सपर्ट आपका रिटर्न फ़ाइल करते हैं ताकि वह आपके GST रिटर्न से मेल खाए। बुकिंग से पहले कीमत दिखती है।

मेरा टर्नओवर सीमा से ज़्यादा है।

तब आप असल लाभ के साथ ITR-3 भरते हैं, और खातों का ऑडिट लग सकता है — नियत तारीख़ 21-Nov-2026। TaxCare के टैक्स एक्सपर्ट यह आपके लिए कर सकते हैं।

लाभ आसानी से घोषित करें। मिनटों में फ़ाइल करें।

TaxCare के साथ आपके पहले रिटर्न पर 25% की छूट। फ़ीस आपकी आय के हिसाब से: ₹1,00,000 तक की आय पर मुफ़्त, फिर ₹49 से — और कभी भी ₹1,499 से ज़्यादा नहीं।

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