कर व्यवस्था, स्लैब और दरें · कर वर्ष 2026-27
पुरानी बनाम नई कर व्यवस्था: आपको कौन-सी चुननी चाहिए?
नई व्यवस्था में दरें कम और रिबेट ज़्यादा है, पर कटौतियाँ बहुत कम मिलती हैं। पुरानी व्यवस्था में दरें ज़्यादा हैं, पर 80C, 80D और होम लोन ब्याज जैसी कटौतियाँ ली जा सकती हैं। स्लैब, कटौतियाँ और उदाहरण देखें।
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अगर आपकी कटौतियाँ कम हैं तो नई व्यवस्था चुनें। इसके स्लैब कम हैं और रिबेट की वजह से ₹12 लाख तक की कर-योग्य आय पर कोई टैक्स नहीं लगता। अगर आपकी कटौतियाँ (80C, 80D, होम लोन ब्याज और दूसरी) इतनी बड़ी हैं कि आपका टैक्स नई व्यवस्था के टैक्स से कम हो जाए, तो पुरानी व्यवस्था चुनें। जानने का एक ही तरीक़ा है: दोनों में टैक्स निकालें।
नीचे के आँकड़े कर वर्ष 2026-27 के लिए आगे लाई गई दरें हैं। ये अनंतिम हैं: ये कर वर्ष 2025-26 (वित्त अधिनियम 2025) के ही मान दोहराते हैं और इन्हें आयकर अधिनियम, 2025 या वित्त अधिनियम 2026 से मिलाकर अभी पुष्ट नहीं किया गया है।
स्लैब आमने-सामने
आय का स्लैब | पुरानी व्यवस्था (60 से कम) | नई व्यवस्था |
|---|---|---|
₹2,50,000 तक | शून्य | शून्य |
₹2,50,001 से ₹4,00,000 | 5% | शून्य |
₹4,00,001 से ₹5,00,000 | 5% | 5% |
₹5,00,001 से ₹8,00,000 | 20% | 5% |
₹8,00,001 से ₹10,00,000 | 20% | 10% |
₹10,00,001 से ₹12,00,000 | 30% | 10% |
₹12,00,001 से ₹16,00,000 | 30% | 15% |
₹16,00,001 से ₹20,00,000 | 30% | 20% |
₹20,00,001 से ₹24,00,000 | 30% | 25% |
₹24,00,000 से ऊपर | 30% | 30% |
पुरानी व्यवस्था में वरिष्ठ नागरिकों (60 से 79 वर्ष) की बुनियादी छूट ₹3,00,000 है और अति वरिष्ठ नागरिकों (80 वर्ष और उससे ऊपर) की ₹5,00,000। दोनों व्यवस्थाओं में टैक्स पर 4% स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर जुड़ता है।
रिबेट, मानक कटौती और सरचार्ज
विशेषता | पुरानी व्यवस्था | नई व्यवस्था |
|---|---|---|
रिबेट (1961 के अधिनियम की धारा 87A) | कुल आय ₹5,00,000 या उससे कम हो तो ₹12,500 तक | कुल आय ₹12,00,000 या उससे कम हो तो ₹60,000 तक, उसके ठीक ऊपर मार्जिनल राहत के साथ |
वेतन या पेंशन पर मानक कटौती | ₹50,000 | ₹75,000 |
सबसे ऊँची सरचार्ज दर | 37% (₹5 करोड़ से ऊपर) | 25% (₹2 करोड़ से ऊपर) |
पारिवारिक पेंशन पर कटौती | एक-तिहाई और ₹15,000 में से जो कम हो | एक-तिहाई और ₹25,000 में से जो कम हो |
आयकर अधिनियम, 2025 में रिबेट धारा 156 में है: कुल आय ₹5,00,000 या उससे कम हो तो ₹12,500 तक, और नई व्यवस्था (धारा 202(1)) में कर लेने वाले व्यक्ति के लिए, कुल आय ₹12,00,000 या उससे कम हो तो ₹60,000 तक, उसके ऊपर मार्जिनल राहत के साथ।
नई व्यवस्था का रिबेट सिर्फ़ सामान्य स्लैब आय पर लगे टैक्स को कवर करता है। कैपिटल गेन जैसी विशेष दर वाली आय के टैक्स को यह कवर नहीं करता।
कौन-सी कटौतियाँ अब भी ली जा सकती हैं
पुरानी व्यवस्था: आप मानक कटौती, अध्याय VI-A की कटौतियाँ ले सकते हैं और मकान की संपत्ति के नुक़सान को सेट-ऑफ़ कर सकते हैं। TaxCare इन्हें इस तरह मानता है:
- धारा 80C, 80CCC और 80CCD(1) मिलाकर: ₹1,50,000 तक।
- धारा 80CCD(1B), अतिरिक्त NPS: ₹50,000।
- धारा 80D, स्वास्थ्य बीमा: अपने और परिवार के लिए ₹25,000 (अगर कोई वरिष्ठ नागरिक कवर है तो ₹50,000), और इतना ही माता-पिता के लिए, कुल मिलाकर ₹1,00,000 तक।
- धारा 80TTA (बचत पर ब्याज): ₹10,000, या वरिष्ठ नागरिकों के लिए 80TTB: ₹50,000।
- स्वयं रहने वाले मकान पर होम लोन ब्याज: ₹2,00,000 तक।
- धारा 80E (शिक्षा लोन का ब्याज) और 80G (दान)।
नई व्यवस्था: मुख्य कटौतियाँ मानक कटौती और आपके NPS खाते में नियोक्ता का योगदान (वेतन का 14% तक) हैं। 80C और 80D समेत अध्याय VI-A की ज़्यादातर कटौतियाँ नहीं मिलतीं, और मकान की संपत्ति के नुक़सान को दूसरी आय से सेट-ऑफ़ नहीं किया जा सकता।
दो उदाहरण
ये 60 से कम उम्र के ऐसे वेतनभोगी व्यक्ति के उदाहरण हैं जिसकी कोई और आय नहीं है। रक़में रुपये तक पूर्णांकित हैं और TaxCare के टैक्स इंजन से आई हैं।
उदाहरण 1: ₹10,00,000 का वेतन, 80C में ₹1,50,000 की कटौतियाँ
- नई व्यवस्था: कर-योग्य आय ₹10,00,000 − ₹75,000 = ₹9,25,000। स्लैब टैक्स ₹32,500 है, और रिबेट उसे हटा देता है। टैक्स: ₹0।
- पुरानी व्यवस्था: कर-योग्य आय ₹10,00,000 − ₹50,000 − ₹1,50,000 = ₹8,00,000। स्लैब टैक्स ₹72,500। आय ₹5,00,000 से ऊपर होने से कोई रिबेट नहीं। 4% उपकर के साथ, टैक्स: ₹75,400।
उदाहरण 2: ₹14,00,000 का वेतन, 80C में ₹1,50,000 की कटौतियाँ
- नई व्यवस्था: कर-योग्य आय ₹13,25,000। स्लैब टैक्स ₹78,750। 4% उपकर के साथ, टैक्स: ₹81,900।
- पुरानी व्यवस्था: कर-योग्य आय ₹12,00,000। स्लैब टैक्स ₹1,72,500। 4% उपकर के साथ, टैक्स: ₹1,79,400।
दोनों उदाहरणों में नई व्यवस्था में टैक्स कम है। पुरानी व्यवस्था आम तौर पर तभी जीतती है जब कटौतियाँ बड़ी हों, जैसे जब आपके पास होम लोन ब्याज, स्वास्थ्य बीमा और NPS का भी बड़ा दावा हो। पक्का करने के लिए अपने आँकड़ों से हिसाब लगाएँ।
क्या व्यवस्था बदली जा सकती है?
वेतनभोगी व्यक्ति के लिए व्यवस्था रिटर्न में चुनी जाती है, इसलिए आप हर साल तुलना कर सकते हैं। TaxCare के नियमों में विलंबित रिटर्न में पुरानी व्यवस्था नहीं ली जा सकती, इसलिए अगर आपको पुरानी व्यवस्था चाहिए तो समय पर रिटर्न भरें।
आयकर अधिनियम, 2025 में नई व्यवस्था (धारा 202) डिफ़ॉल्ट है। पुरानी व्यवस्था तभी लागू होती है जब आप उससे बाहर निकलने का विकल्प चुनें:
- कारोबार या पेशे की आय नहीं है: आप अंतिम तारीख़ तक भरे रिटर्न में, सिर्फ़ उसी कर वर्ष के लिए विकल्प चुनते हैं, इसलिए चुनाव हर साल अलग हो सकता है।
- कारोबार या पेशे की आय है: आप अंतिम तारीख़ पर या उससे पहले विकल्प चुनते हैं, और वह चुनाव आगे के सालों में भी चलता है। उसे सिर्फ़ एक बार वापस लिया जा सकता है। उसके बाद आप दोबारा विकल्प नहीं चुन सकते, जब तक कि आपकी कारोबार या पेशे की आय ख़त्म न हो जाए।
TaxCare कैसे मदद करता है
TaxCare आपके अपने डेटा से दोनों व्यवस्थाओं में आपका टैक्स निकालता है और फ़ैसले से पहले फ़र्क़ दिखाता है। वह पोर्टल से आपका वेतन, TDS और दूसरी आय ले आता है, इसलिए आपको इन्हें हाथ से भरना नहीं पड़ता। चुनाव हमेशा आपका रहता है, और आपकी मंज़ूरी के बिना कुछ भी सबमिट नहीं होता।
यह गाइड सामान्य जानकारी देती है, पेशेवर कर सलाह नहीं।
इस विषय पर सवाल
₹10 लाख के वेतन के लिए कौन-सी व्यवस्था बेहतर है?
नीचे दिए आँकड़ों के हिसाब से, ₹10 लाख के वेतन वाले वेतनभोगी व्यक्ति को रिबेट की वजह से नई व्यवस्था में कोई टैक्स नहीं लगता। पुरानी व्यवस्था में, ₹1,50,000 की 80C कटौती के बाद भी टैक्स शून्य से ज़्यादा रहता है। फ़ैसला आपकी अपनी कटौतियों से होता है, इसलिए दोनों की तुलना करें।
क्या मैं हर साल एक व्यवस्था से दूसरी में जा सकता हूँ?
कारोबार या पेशे की आय न हो तो हाँ: चुनाव अंतिम तारीख़ तक भरे हर रिटर्न में किया जाता है। कारोबार या पेशे की आय हो तो पुरानी व्यवस्था का चुनाव आगे के सालों में भी चलता है और उसे सिर्फ़ एक बार वापस लिया जा सकता है।
क्या विलंबित रिटर्न में मैं पुरानी व्यवस्था ले सकता हूँ?
TaxCare के नियमों में नहीं। विलंबित रिटर्न में नई व्यवस्था लागू होती है।
क्या मानक कटौती दोनों व्यवस्थाओं में मिलती है?
हाँ, वेतनभोगियों और पेंशनभोगियों को, पर रक़म अलग है: 2025-26 के नियमों में पुरानी व्यवस्था में ₹50,000 और नई व्यवस्था में ₹75,000।
अपना ITR भरने के लिए तैयार हैं?
TaxCare आयकर पोर्टल से आपका AIS और TDS लाता है, हर आँकड़ा जाँचता है और वह रिटर्न भरता है जिसमें आपकी सबसे ज़्यादा बचत हो। पहली फ़ाइलिंग पर 25% छूट।