पूंजीगत लाभ और निवेश · कर वर्ष 2025-26
भारत में शेयर बेचने पर टैक्स
लिस्टेड शेयरों का गेन 12 महीने के अंदर बेचने पर शॉर्ट-टर्म और उसके बाद लॉन्ग-टर्म होता है। शॉर्ट-टर्म गेन पर 20% और ₹1,25,000 से ऊपर के लॉन्ग-टर्म गेन पर 12.5% टैक्स लगता है। इंट्राडे और F&O बिज़नेस आय की तरह टैक्स होते हैं।
इस पेज पर
लिस्टेड शेयरों पर, जहाँ सिक्योरिटीज़ ट्रांज़ैक्शन टैक्स (STT) चुकाया गया हो, अगर आपने शेयर 12 महीने या उससे कम रखे तो गेन शॉर्ट-टर्म है और उस पर 20% टैक्स लगता है। 12 महीने से ज़्यादा रखे तो गेन लॉन्ग-टर्म है और साल के ₹1,25,000 से ऊपर के गेन पर 12.5% टैक्स लगता है। ये कर वर्ष 2025-26 के लिए TaxCare की पक्की की हुई दरें हैं, 23 जुलाई 2024 या उसके बाद के ट्रांसफ़र के लिए।
कर वर्ष 2026-27 की दरें अस्थायी हैं। वे यही मान आगे दोहराती हैं और आयकर अधिनियम, 2025 से मिलान करके पक्की नहीं की गई हैं। उस अधिनियम में लिस्टेड शेयरों के शॉर्ट-टर्म गेन (1961 के अधिनियम की धारा 111A) धारा 196 में आते हैं, और ₹1,25,000 से ऊपर के लॉन्ग-टर्म गेन (1961 के अधिनियम की धारा 112A) धारा 198 में।
शॉर्ट-टर्म बनाम लॉन्ग-टर्म
| शॉर्ट-टर्म | लॉन्ग-टर्म |
|---|---|---|
होल्डिंग अवधि (लिस्टेड शेयर और इक्विटी फ़ंड) | 12 महीने या कम | 12 महीने से ज़्यादा |
23 जुलाई 2024 से ट्रांसफ़र पर दर | 20% | ₹1,25,000 से ऊपर के गेन पर 12.5% |
23 जुलाई 2024 से पहले की दर | 15% | उसी छूट से ऊपर 10% |
अगर आपने कुछ शेयर 23 जुलाई 2024 से पहले और कुछ उसके बाद बेचे, तो हर लॉट पर उसकी अपनी ट्रांसफ़र तारीख़ की दर लगती है। हर संपत्ति के होल्डिंग अवधि के पूरे नियमों के लिए देखें हर संपत्ति के होल्डिंग अवधि नियम।
उदाहरण
आप कर वर्ष 2025-26 में, 23 जुलाई 2024 के बाद, लिस्टेड शेयर बेचते हैं:
- शॉर्ट-टर्म गेन: ₹40,000। 20% के हिसाब से टैक्स = ₹8,000।
- लॉन्ग-टर्म गेन: ₹2,25,000। पहले ₹1,25,000 पर छूट है। बाकी ₹1,00,000 पर 12.5% के हिसाब से टैक्स = ₹12,500।
- सेस से पहले कुल टैक्स: ₹20,500। 4% सेस के साथ: ₹21,320।
यह मानकर चला गया है कि आपकी बाकी आय पहले ही बुनियादी छूट सीमा खर्च कर चुकी है। TaxCare का टैक्स इंजन दोनों कर व्यवस्थाओं में यही ₹21,320 देता है।
ज़्यादा आय पर टैक्स में सेस से पहले सरचार्ज जुड़ता है: ₹50 लाख से ऊपर की आय पर 10%, ₹1 करोड़ से ऊपर 15%। इन शेयर गेन पर सरचार्ज 15% से ऊपर कभी नहीं जाता, भले ही आपकी बाकी आय पर 25% या 37% लगता हो। ₹60 लाख की सैलरी के साथ यही गेन ₹21,320 की जगह ₹23,452 के पड़ते हैं।
1 फ़रवरी 2018 से पहले ख़रीदे शेयर
1 फ़रवरी 2018 से पहले ख़रीदे इक्विटी शेयर और इक्विटी फ़ंड के लॉन्ग-टर्म गेन की लागत, जहाँ इससे गेन कम बैठे, 31 जनवरी 2018 के उचित बाज़ार मूल्य के आधार पर ली जाती है। इसे ग्रैंडफ़ादरिंग कहते हैं।
जो लागत ली जाती है, वह असली लागत और इन दोनों में से कम वाले में से ज़्यादा होती है: 31 जनवरी 2018 का उचित बाज़ार मूल्य और बिक्री मूल्य।
कौन-सा ITR फ़ॉर्म
- ITR-1: सिर्फ़ तब, जब इस धारा के तहत आपके लॉन्ग-टर्म गेन ₹1,25,000 के अंदर हों और कोई दूसरा कैपिटल गेन न हो।
- ITR-2: कोई भी शॉर्ट-टर्म गेन, बड़े लॉन्ग-टर्म गेन या दूसरे कैपिटल गेन्स हों, और बिज़नेस आय न हो।
- ITR-3: अगर आपकी ट्रेडिंग से भी आय है, जैसे इंट्राडे या F&O।
देखें ITR-1 बनाम ITR-2।
इंट्राडे और F&O कैपिटल गेन्स नहीं हैं
- इंट्राडे इक्विटी स्पेक्युलेटिव बिज़नेस आय है।
- F&O नॉन-स्पेक्युलेटिव बिज़नेस आय है।
- दोनों ITR-3 में जाते हैं, और टर्नओवर सीमा पार करे तो टैक्स ऑडिट भी लग सकता है। TaxCare के नियमों में F&O का टर्नओवर, मुनाफ़े और नुकसान के पूर्ण मूल्यों के जोड़ में मिले ऑप्शन प्रीमियम को जोड़कर निकलता है।
स्पेक्युलेटिव बिज़नेस का नुकसान सिर्फ़ स्पेक्युलेटिव मुनाफ़े से सेट-ऑफ़ हो सकता है और 4 साल आगे ले जाया जा सकता है। दूसरे बिज़नेस नुकसान 8 साल आगे ले जाए जा सकते हैं।
1961 के अधिनियम की धारा 44AB के तहत, बिज़नेस का टर्नओवर ₹1 करोड़ से ऊपर हो तो टैक्स ऑडिट चाहिए। जहाँ नकद प्राप्तियाँ और नकद भुगतान, दोनों कुल के 5% के अंदर हों, वहाँ यह सीमा ₹10 करोड़ है। आपकी ट्रेडिंग पर ऑडिट लगेगा या नहीं, यह दूसरे नियमों पर भी निर्भर करता है, इसलिए टैक्स एक्सपर्ट से पूछ लें।
शेयरों पर नुकसान
नुकसान | किससे सेट-ऑफ़ हो सकता है | आगे ले जाना |
|---|---|---|
शॉर्ट-टर्म कैपिटल लॉस | शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स | 8 साल |
लॉन्ग-टर्म कैपिटल लॉस | सिर्फ़ लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स | 8 साल |
नुकसान आगे ले जाने के लिए अपना रिटर्न समय पर भरें। देर से भरा रिटर्न ज़्यादातर नुकसान आगे नहीं ले जा सकता। कैपिटल लॉस कभी सैलरी जैसी दूसरी आय की मदों में नहीं जाता।
बाकी नियम संक्षेप में
- रिबेट। नई कर व्यवस्था की रिबेट इन जैसे विशेष दर वाले गेन के टैक्स पर लागू नहीं होती। पुरानी कर व्यवस्था की रिबेट शॉर्ट-टर्म गेन के टैक्स से सेट-ऑफ़ हो सकती है, पर इस धारा के लॉन्ग-टर्म गेन से नहीं।
- स्पेसिफ़ाइड म्यूचुअल फ़ंड। 1 अप्रैल 2023 या उसके बाद ख़रीदी गई डेट म्यूचुअल फ़ंड यूनिट, होल्डिंग अवधि चाहे जो हो, शॉर्ट-टर्म मानकर स्लैब दर से टैक्स होती हैं।
- अनलिस्टेड शेयरों की होल्डिंग अवधि और दर अलग हैं। देखें होल्डिंग अवधि के नियम।
- एडवांस टैक्स। कैपिटल गेन्स से साल के बीच में भी टैक्स देनदारी बन सकती है। TaxCare के नियमों में, TDS के बाद टैक्स ₹10,000 या उससे ज़्यादा हो तो एडवांस टैक्स लगता है।
क्या संभालकर रखें
कॉन्ट्रैक्ट नोट या आपके ब्रोकर का प्रॉफ़िट और लॉस स्टेटमेंट, ख़रीद और बिक्री की तारीख़ें व क़ीमतें, और पुरानी होल्डिंग के लिए 31 जनवरी 2018 का मूल्य।
TaxCare कैसे मदद करता है
अपने ब्रोकर का P&L या टैक्स स्टेटमेंट (Zerodha, Groww या Upstox) अपलोड करें। TaxCare ट्रेड को उस कर वर्ष के शॉर्ट-टर्म, लॉन्ग-टर्म, इंट्राडे और F&O नतीजों में बाँटता है, हर लॉट पर उसकी दर और छूट लगाता है, और सही ITR फ़ॉर्म चुनता है। ट्रेडिंग जटिल हो तो टैक्स एक्सपर्ट मदद कर सकता है। देखें टैक्स एक्सपर्ट और इनकम टैक्स कैलकुलेटर।
यह गाइड सामान्य जानकारी देती है, पेशेवर कर सलाह नहीं।
इस विषय पर सवाल
शेयरों से शॉर्ट-टर्म गेन पर कितना टैक्स लगता है?
जिन लिस्टेड शेयरों पर सिक्योरिटीज़ ट्रांज़ैक्शन टैक्स चुकाया गया है, उनके शॉर्ट-टर्म गेन पर 23 जुलाई 2024 या उसके बाद के ट्रांसफ़र पर 20% टैक्स लगता है, कर वर्ष 2025-26 के लिए TaxCare के नियमों के अनुसार।
लॉन्ग-टर्म गेन पर कितना टैक्स लगता है?
12 महीने से ज़्यादा रखे गए लिस्टेड शेयर और इक्विटी फ़ंड पर, साल के ₹1,25,000 से ऊपर के गेन पर 12.5%।
क्या इंट्राडे ट्रेडिंग पर कैपिटल गेन्स टैक्स लगता है?
नहीं। इंट्राडे इक्विटी ट्रेड स्पेक्युलेटिव बिज़नेस आय हैं और F&O नॉन-स्पेक्युलेटिव बिज़नेस आय है।
क्या मैं शेयरों का नुकसान सेट-ऑफ़ कर सकता हूँ?
कैपिटल लॉस सिर्फ़ कैपिटल गेन्स से सेट-ऑफ़ होता है। शॉर्ट-टर्म नुकसान शॉर्ट-टर्म या लॉन्ग-टर्म गेन से सेट-ऑफ़ हो सकता है। लॉन्ग-टर्म नुकसान सिर्फ़ लॉन्ग-टर्म गेन से।
मुझे कौन-सा ITR फ़ॉर्म भरना होगा?
ITR-1 तभी, जब लिस्टेड शेयरों पर लॉन्ग-टर्म गेन ₹1,25,000 के अंदर हो और कोई दूसरा कैपिटल गेन न हो। वरना ITR-2, और ट्रेडिंग से आय हो तो ITR-3।
अपना ITR भरने के लिए तैयार हैं?
TaxCare आयकर पोर्टल से आपका AIS और TDS लाता है, हर आँकड़ा जाँचता है और वह रिटर्न भरता है जिसमें आपकी सबसे ज़्यादा बचत हो। पहली फ़ाइलिंग पर 25% छूट।